
॥ धर्मो रक्षति रक्षितः ॥
भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की तपस्या, त्याग और सनातन संस्कारों की पावन भूमि है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब हमारी संस्कृति, परंपराओं और मंदिरों पर संकट के बादल छाए, तब-तब इसी मिट्टी से ऐसे राष्ट्रभक्त और धर्मयोद्धा खड़े हुए जिन्होंने सनातन की अखंड ज्योति को बुझने नहीं दिया।
आज का युग केवल भौतिक प्रगति का नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक आत्मरक्षा का युग है। पाश्चात्य अंधानुकरण, सामाजिक विखंडन और हमारी गौरवशाली परंपराओं के प्रति उदासीनता आज सनातन समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों के बीच मूकदर्शक बने रहने का समय अब बीत चुका है।
धर्म, संस्कृति, गोमाता और मंदिरों के संरक्षण के इसी पावन संकल्प के साथ राष्ट्रीय हिन्दू रक्षक संघ (RHRS) पूरे भारतवर्ष में धर्मरक्षकों की एक सशक्त, अनुशासित और वैचारिक सेना का निर्माण कर रहा है।
हमारी आस्था के चार आधार स्तंभ: RHRS का मूल संकल्प
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षक संघ केवल एक संस्था नहीं, बल्कि हर सनातनी के हृदय में प्रज्वलित स्वाभिमान की ज्वाला है। हमारा हर कदम सनातन समाज के सर्वांगीण उत्थान के लिए समर्पित है:
1. सनातन धर्म एवं वैदिक मूल्यों का संरक्षण: वेदों और उपनिषदों के शाश्वत ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना, धर्मान्तरण जैसी कुरीतियों के विरुद्ध समाज को जागरूक करना और हर हिन्दू परिवार में धार्मिक स्वाभिमान जगाना।
2. गोमाता की रक्षा एवं संवर्धन: गोवंश भारतीय कृषि और आस्था की रीढ़ है। गोहत्या की रोकथाम, उपेक्षित गायों का संरक्षण और आधुनिक गौशालाओं के माध्यम से गोमाता की सेवा को जन-आंदोलन बनाना।
3. प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं सुरक्षा: जो ऐतिहासिक मंदिर देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं, उन्हें पुनः प्रतिष्ठापित करना और सनातन तीर्थों की गरिमा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना।
4. भावी पीढ़ी को संस्कारों की सौगात: हमारे बच्चों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्य, गौरवशाली इतिहास और चरित्र निर्माण की शिक्षा देना ताकि वे भविष्य में राष्ट्र और धर्म का नाम रोशन कर सकें।
नेतृत्व का आह्वान: डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति का संदेश
“धर्म की रक्षा किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं, यह पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। यदि आज हम अपने मंदिरों, अपनी गोमाता और अपनी संस्कृति के लिए खड़े नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। उठो, जागो और सनातन की रक्षा के लिए एक सूत्र में बंध जाओ।”
— डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति (Dr. Srikanth Chennupati), राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय हिन्दू रक्षक संघ (RHRS)
डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति के दूरदर्शी नेतृत्व में यह संगठन देश के कोने-कोने में युवाओं को राष्ट्र और धर्म के प्रति जागरूक करने के लिए दिन-रात प्रयासरत है।
इतिहास मूकदर्शकों को नहीं, इतिहास रचने वालों को याद रखता है
सोचिए, क्या हमारी जिम्मेदारी केवल अपने दैनिक जीवन तक सीमित है? जब मंदिर उपेक्षित हों, जब गोमाता सड़कों पर बेसहारा हो, तब मौन रहना किसी अपराध से कम नहीं।
RHRS आपको एक ऐसा सशक्त मंच प्रदान करता है जहाँ आपकी आवाज़, आपका समय और आपका समर्पण सीधे सनातन समाज के काम आता है। चाहे आप छात्र हों, व्यवसायी हों, नौकरीपेशा हों या समाज के वरिष्ठ नागरिक—आपकी एक पहल सनातन संस्कृति को एक नया संबल दे सकती है।
आज ही लें सदस्यता: धर्म रक्षा के महायज्ञ में दें अपनी आहुति
संगठन का हिस्सा बनना केवल एक फॉर्म भरना नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा का आजीवन संकल्प लेना है। डिजिटल सदस्यता अभियान शुरू हो चुका है, आप घर बैठे कुछ ही मिनटों में संघ से जुड़ सकते हैं:
आधिकारिक वेबसाइट:
www.rhrs.org.in | www.rhrs.co.in
(वेबसाइट पर जाएं और ‘सदस्यता पंजीकरण’ विकल्प चुनें)
हेल्पलाइन / संपर्क सूत्र:
📞 +91 9030936999
📞 +91 8906189999
(किसी भी जानकारी या सीधे सहयोग के लिए संपर्क करें)
आधिकारिक ईमेल:
📧 rashtriyahindurakshaksangh@gmail.com
इस संदेश को केवल पढ़ें नहीं, हर सनातनी तक पहुँचाएं। आज ही RHRS की सदस्यता लें और गर्व से कहें — “मैं सनातनी हूँ, मैं धर्म रक्षक हूँ!”








