
रांची (झारखंड):
ह्यूमन राइट्स काउंसिल फॉर इंडिया (HRCI) के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति ने कहा कि समाज में मानवाधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने वंचित एवं शोषित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आने का आह्वान किया।
अपने उत्तर भारत के व्यापक संगठनात्मक दौरे के तहत डॉ. चेन्नुपति ने गुरुवार को झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित एचआरसीआई की एक उच्चस्तरीय बैठक को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
कानूनी जागरूकता ही अधिकारों का सुरक्षा कवच
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति ने स्पष्ट किया कि एचआरसीआई देश भर में मानवाधिकारों के हनन को रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आम जनता में कानूनी साक्षरता का प्रसार अत्यंत आवश्यक है।
“सच्चा सशक्तिकरण जागरूकता से ही संभव है। जब नागरिक अपने कानूनी अधिकारों को समझेंगे, तभी वे शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज उठा सकेंगे और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे।” — डॉ. श्रीकांत चेन्नुपति
जमीनी समस्याओं पर सकारात्मक रुख
इस बैठक में झारखंड राज्य के प्रतिनिधियों के साथ-साथ उत्तर क्षेत्र (नॉर्थ ज़ोन) के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों और सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं, स्थानीय चुनौतियों और संगठन को सुदृढ़ करने के संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
सदस्यों की चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद डॉ. चेन्नुपति ने ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया:
प्रशासनिक पहल: स्थानीय स्तर के मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे वार्ता की जाएगी।
विधिक सहायता: जहां भी आवश्यकता होगी, संगठन पीड़ितों को पूर्ण कानूनी सहायता और सहयोग प्रदान करेगा।
संगठनात्मक समन्वय: उन्होंने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को समर्पण, निष्ठा और आपसी सामंजस्य के साथ मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करने का निर्देश दिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में एचआरसीआई नॉर्थ ज़ोन के वरिष्ठ नेता, झारखंड राज्य समिति के सदस्य और प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।








