
पुलिस विफलता की बात सच है—जिला एसपी ने स्वीकारा
ताड़ीकोंडा सीआई उमेश और स्टाफ पर BNS 103 व SC/ST एक्ट के तहत दर्ज हो मामला
चीकटी गोपी के शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Re-postmortem) कराने की मांग
क्राउन ह्यूमन राइट्स (गुंटूर – विशेष संवाददाता):
गुंटूर जिले के ताड़ीकोंडा पुलिस स्टेशन में दलित ऑटो चालक चीकटी गोपी की कथित लॉकअप डेथ को लेकर आक्रोश भड़क उठा है। इस अमानवीय कृत्य के जिम्मेदार ताड़ीकोंडा सीआई उमेश, एसआई ज्योति और कांस्टेबल मुरली को तत्काल गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाने की मांग को लेकर दलित नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को गुंटूर जिला एसपी कार्यालय में जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) वकुल जिंदल से दलित नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान एसपी ने माना कि इस मामले में पुलिस की विफलता एक सच्चाई है और इसके लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच जारी है।
बर्बर यातनाएं और प्राइवेट पार्ट पर बूट से हमला
नेताओं ने एसपी को बताया कि पोन्नेकल्लू गांव निवासी दलित युवक चीकटी गोपी ऑटो चलाकर जीवन यापन करता था। चिंताजल्लू गोपी नामक युवक द्वारा एक स्थानीय टीडीपी नेता की अंगूठी गिरवी रखने के मामले में निर्दोष चीकटी गोपी को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया। आरोप है कि सीआई उमेश, एसआई ज्योति और तेनाली में पूर्व में दलित युवकों पर लाठीचार्ज के आरोपी रहे कांस्टेबल मुरली ने मिलकर गोपी को हंटर से पीटा और जमीन पर बैठाकर उसके मर्मस्थल (प्राइवेट पार्ट) पर बूटों से बेरहमी से लात मारी। इस बर्बर यातना के चलते आंतरिक चोटों और गंभीर बुखार के कारण पिछले महीने की 1 तारीख को गुंटूर जीजीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
साक्ष्य मिटाने का आरोप, री-पोस्टमार्टम की मांग
घटना के प्रत्यक्षदर्शी चिंताजल्लू गोपी को पुलिस ने धमकी दी थी कि यदि उसने मुंह खोला तो उस पर गांजा और सोने की चोरी का झूठा केस दर्ज कर दिया जाएगा, जिसके डर से वह फरार हो गया था। हाल ही में सामने आए इस प्रत्यक्षदर्शी के बयानों के आधार पर नेताओं ने मांग की:
धाराओं में बदलाव: आरोपी सीआई उमेश और अन्य पुलिसकर्मियों पर तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए।
पुनः पोस्टमार्टम: नेताओं ने आशंका जताई कि ताड़ीकोंडा पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर किया है, इसलिए चीकटी गोपी के शव का पुनः पोस्टमार्टम (Re-postmortem) कराया जाना अनिवार्य है।
’कानून सबके लिए एक समान हो’
नेताओं ने विजयवाड़ा के कृष्णलंका मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां एक अन्य मामले में सीआई और पुलिसकर्मियों को तुरंत जेल भेजा गया था और सीपी राजशेखर बाबू ने एससी/एसटी एक्ट लागू किया था। ठीक उसी तरह यहां भी निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को फौरन सलाखों के पीछे भेजा जाए।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी वकुल जिंदल ने बताया कि एएसपी रविकुमार के नेतृत्व में एक डीएसपी और दो सीआई की एसआईटी जांच कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एसआईटी रिपोर्ट आते ही संबंधित धाराओं को बदला जाएगा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मन्दा कृष्णा मादिगा, कोरिवी विनय कुमार, नीलम नागेंद्रराव, नीलांबरम, शिखा सुरेश, बत्तुला वीरास्वामी, दारा अंजय्या सहित कई प्रमुख नेता शामिल थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।








